Thundan/ September 1, 2017/ Hindi Romantic Stories, Hindi Sex Stories

लेखिका – कशिश
अनुवाद तथा संपादन – मस्त कामिनी
ये मेरी मेरे पति के साथ दरिया किनारे की चुदाई – “दरिया किनारे चूत पुकारे” के अगले दिन की बात है.
आप को याद होगा की कैसे खुले आसमन के नीचे, दरिया किनारे मेरे पति ने मेरी जम कर चुदाई की थी.
दोपहर का वक़्त था.
हम सब ने खाना खा लिया था और मैं अपने कमरे मे थी.
मेरे पति वहाँ ही बैठे थे और अपने माँ बाप से बातें कर रहे थे.
मैं अपने कमरे मे बैठी, गंगा के बारे मे सोच रही थी.
(आप को याद होगा, गंगा मेरे पति की पुरानी प्रेमिका है, जो हमारे पड़ोस मे रहती है. वो शादीशुदा है पर उसका पति ना-मर्द है और उसको चोद नहीं पता है.)
आप को ये भी याद होगा की मेरी शादी के पहले हम तीनों ने – मैंने, मेरे पति ने और गंगा ने, एक बार “सामूहिक संभोग” का मज़ा लिया था.
मेरा मन चाहता था की मेरे पति फिर से एक बार, मुझे और गंगा को साथ साथ चोदें.
मस्त कहानियाँ हैं, मेरी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर !!! !!
आप की जानकारी के लिए बता दूं की मैं और गंगा हमेशा ही, एक दूसरी के संपर्क मे रहती हैं.
हम एक दूसरी को नियमित रूप से मेल देती हैं, फोन पर बात करती हैं.
इसलिए मुझे पता है की गंगा भी फिर से, मेरे पति से चुदवाना चाहती है.
उसका पति तो उसको चोद नहीं पाता है और वो और किसी से चुदवाना नहीं चाहती.
वो सिर्फ़ मेरे पति से ही चुदवाना चाहती है.
जैसा की मैंने पहले लिखा था, उसका पति तो अभी तक उसकी फुददी मे अपना लण्ड कभी भी नहीं घुसा पाया था.
जब भी गंगा का पति, गंगा को चोदने की कोशिश करता है, हमेशा उसके लण्ड का पानी गंगा की चूत के दरवाजे पर ही, बाहर ही निकल जाता है.
उस का लौड़ा खड़ा तो होता है पर जैसे ही वो गंगा चोदने की कोशिश करता है, उसके लण्ड का पानी निकल जाता है.
मैंने गंगा से वादा किया था की इस बार हम जब भी जालंधर आएँगे, मैं ज़रूर उसको अपने साथ ही, अपने पति से फिर से चुदवाउंगी.
अब वादा पूरा करने का समय आ गया था.
मैंने बहुत मुश्किल से अपने पति को मेरे साथ साथ गंगा को भी चोदने के लिए राज़ी किया था.
दरअसल, मेरे पति मेरे सिवाय किसी और को चोदना पसंद नहीं करते.
मैंने बड़ी मुश्किल से उनको गंगा की मज़बूरी और उसकी बदक़िस्मती का वास्ता दे कर इस बार राज़ी किया था.
मेरे ख़यालों मे गंगा, मेरी आँखों के सामने आ गई.
मस्त कहानियाँ हैं, मेरी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर !!! !!
गंगा बहुत सुंदर है, उसका बदन बहुत खूबसूरत, बहुत सेक्सी है.
लंबाई मे वो मुझ से थोड़ी कम है.
उसके बाल लंबे है और गंगा की गाण्ड तक आते हैं.
गंगा की गाण्ड बहुत मस्त है.
एक दम गोल गोल, प्यारी प्यारी.
उसकी मस्त चुचियाँ, मेरी चुचियों से थोड़ी सी बड़ी हैं.
कुल मिला कर, उसका बदन बहुत नशीला और सेक्सी है जिसे देखते ही शायद मर्दों का मन, उसको चोदने का करता होगा.
हम दोनों, बहुत अच्छी दोस्त हैं.
मैं जब भी जालंधर आती हूँ, हम हमेशा मिलते रहते हैं.
कभी उसके घर पर और कभी मेरे घर पर.
उसका घर, मेरे ससुराल के एकदम पड़ोस मे है.
वो बहुत कम अपने घर से निकलती है और जब भी बाहर निकलती है, सीधे हमारे घर ही आती है, ये सब जानते हैं.
तो…
मैं अपने कमरे मे थी और मेरे पति बाहर के कमरे मे बैठे, अपने माता पिता से बातें कर रहे थे. तभी गंगा हमारे घर पर आई.
उसने मेरे कमरे मे आने से पहले, बाहर के कमरे मे बैठे मेरे पति और मेरे सास ससुर से थोड़ी देर बातें की.
फिर वो मुझ से मिलने, मेरे कमरे मे आई.
गंगा ने उस समय, पंजाबी सूट पहना हुआ था.
उस की चुचियों की निप्पल सख़्त थीं, उठी हुई थीं, जिस से पता चल रहा था की वो अंदर ब्रा नहीं पहने है.
खाना खा कर, अपने रूम मे आ कर मैंने भी अपने कपड़े बदल लिए थे.
मैं अब टी – शर्ट और स्कर्ट पहने हुए थी और नीचे ब्रा और चड्डी नहीं पहनी थी.
गंगा मेरे कमरे के अंदर आई, दरवाज़ा अंदर से बंद किया और मुझ से लिपट गई.
मस्त कहानियाँ हैं, मेरी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर !!! !!
मैंने उसके होठों को चूमा और हम बंद दरवाजे के पीछे, बातें करने लगी.
गंगा ने मुझे बताया की वो हमेशा संतुष्ट होने के लिए, हस्तमैथुन करती है.
वो अपनी चूत मे खुद ही उंगली कर के झड़ती ज़रूर है, पर फिर भी ज़ोर से नहीं झड़ती और उसको वो पूरा मज़ा नहीं आता है, जो मज़ा मैंने उसको “लेज़्बीयन चुदाई” के दौरान उसकी चूत मे उंगली कर के दिया है.

वो मुझ से हस्तमैथुन करने का सही तरीका जान ना चाहती थी ताकि जब भी वो चाहे, अपनी चूत रगड़ कर, चूत मे उंगली कर के, झड़ने का पूरा पूरा मज़ा ले सके.
मैंने गंगा को फिर से, उसकी चूत मे उंगली कर के, प्रॅक्टिकल कर के समझाया.
वो मुझ से हस्तमैथुन करवा कर, अपनी चूत मे उंगली करवा कर, झड़ कर, जल्दी ही वापस अपने घर चली गई.
मैंने गंगा को बताया की मैं अपने पिताजी के फार्म हाउस पर, अपने पति के साथ जाने का प्रोग्राम बना रही हूँ और चाहती हूँ की वो भी हमारे साथ चले, ताकि वहाँ वो और मैं, दोनों ही जम कर मेरे पति से चुदवा सकें.
वो हमारे साथ आने के लिए मान गई.
उसने कहा की वो हमारे साथ आने के लिए तैयार है पर हम को उसके सास ससुर से पर्मिशन लेनी होगी.
मैंने उसको कहा की ये मैं कर लूँगी.
गंगा के जाने के थोड़ी देर बाद, मेरे पति कमरे मे आए.
मैंने अपने पति से कहा की अगले दिन हम को मेरे पिताजी के फार्म हाउस जाने का प्रोग्राम बनाना है, गंगा भी हमारे साथ आने को तैयार हो गई है और अब उनको हम दोनों को एक साथ चोदने को तैयार हो जाना चाहिए.
सफर जारी है… …
अपने सुझाव और राय भेजना बंद मत कीजियेगा।
धन्यवाद
लव यु आल
सेक्सी कशिश