Thundan/ September 1, 2017/ Hindi Romantic Stories, Hindi Sex Stories

लेखिका – कशिश
अनुवाद तथा संपादन – मस्त कामिनी
मेरी एक चूची और निप्पल तो वो अपने मुंह मे ले कर चूस रहे थे और दूसरी चूची और निप्पल को अपने हाथ मे ले कर उस से खेलने लगे, दबाने लगे और मसलने लगे।
मेरी हमेशा नरम और मुलायम रहने वाली निप्पल्स, उनके चूसने और खेलने की वजह से तन कर खड़ी हो गई थी।
मेरी चूची, उनकी हथेली मे किसी नरम बॉल की तरह लग रही थी।
कुछ देर बाद, उन्होंने मेरी चूचीयों की अदला बदली की और जो चूची वो चूस रहे थे उस से खेलने लगे और जिस चूची से वो खेल रहे थे, उसको चूसने लगे।
इस तरह, मेरी दोनों चूचीयों को उन्होंने चूसा और दोनों को मसला।
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ये खेल काफ़ी देर तक चलता रहा क्यों की मुझे मेरी चुचियाँ चुसवा कर, मसलवा कर और दबा कर मज़ा आ रहा था और उनको मेरी चुचियाँ चूस कर, दबा कर और मसल कर मज़ा आ रहा था।
इस खेल का पूरा मज़ा लेने के बाद, उन्होंने मुझे फिर से बिस्तर पर मेरी पीठ के बल लिटा दिया।
अब उनका मुंह घूमता हुआ, मेरे नंगे बदन के निचले हिस्से पर जाने लगा।
जैसे ही, उनके होठों ने मेरी सफाचत चूत को टच किया, मैं रोमांचित हो उठी और मेरे रोएँ खड़े हो गये।
मेरी चूत पर, उन्होंने बहुत सारे चुंबन दिए।
बीच बीच मे, वो अपनी ठोड़ी मेरी चूत पर चुभा रहे थे और अचानक ही वो पागलों की तरह मेरी चूत को चूसने लगे…
उनकी इस हरकत ने, मुझे अचानक ही बहुत गरम कर दिया।
वो मेरी फुददी ऐसे चाट रहे थे, जैसे किसी कपड़े से फर्श की सफाई की जाती है।
फिर उन्होंने अपनी उंगलियों की मदद के मेरी चूत को खोला और मेरी चूत के दाने को अपने मुंह मे ले कर चूसने लगे – अया आ आआः आहह आ हह मा आ आआः आ अहह… आआआअहह… मेरे मुंह से निकला।
वो लागतर, बिना रुके मेरी चूत का दाना चूसते जा रहे थे।
मेरी चूत का दाना चूस कर, उन्होंने मुझे और मेरी चूत को इतना गरम कर दिया की मैं झड़ने की तरफ बढ़ने लगी और मेरी चूत से रस की नदी सी बहने लगी।
जल्दी ही, उन्होंने मेरी चूत का मुंह खोला और अपनी जीभ मेरी चूत मे डाल दी।
मेरी चूत के अंदर, वो अपनी जीभ घुमाने लगे और मैं आसमान मे उड़ने लगी।
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उनकी इस सेक्सी हरकत ने मुझे इतना बेचैन कर दिया की मेरे मुंह से आनंद भरी आवाज़ें निकलने लगीं और मैं अपनी गाण्ड बिस्तर से उठाने लगी और पटकने लगी।
मैंने उनके सिर के बाल पीछे से पकड़े और उनका मुंह अपनी बहती चूत पर ज़ोर ज़ोर से दबाने लगी तो वो और ज़ोर ज़ोर से मेरी फुददी को अपनी जीभ से चोदने लगे।
मुझे तो जैसे असली चुदाई का मज़ा आने लगा…
जिस तरह से वो मेरी चूत चूस रहे थे, चाट रहे थे और मेरी चूत मे अपनी जीभ घुमा रहे थे उस से लगता था की आज वो मेरी चूत का सारा रस निकाल कर पी जाएँगे।
लेकिन, मेरी फुददी का जितना रस वो चाट रहे थे उतना ही, और रस मेरी फुददी से निकल रहा था..
उनके इस तरह से मेरी चूत के चाटने से, मेरी चूत मे जीभ घुमाने से सीटी के बजने जैसे आवाज़ आ रही थी।
मैं कुछ इस तरह बिस्तर मे उछल रही थी, इस तरह अपनी गाण्ड उठा और पटक रही थी की लगता था जैसे मैं बिस्तर से नीचे गिर जाउंगी।
अचानक, मैंने अपना विचार बदला और उनको बिस्तर पर सीधे लेटने को कहा।
वो समझ गये की मैं क्या चाहती हूँ।
उनके सीधे लेटने के बाद, मैं उनकी छाती पर चढ़ गई और जितना हो सकता था, अपने पैर चौड़े किए और अपनी रिसती हुई चूत को उनके मुंह पर सटा दिया।
जैसे ही, मेरी फुददी उनके मुंह पर लगी, मैंने उनके सिर को अपने पैरों मे, जांघों के बीच जकड़ लिया।
उन्होंने मेरी चूत को चूसना शुरू किया और मैं बार बार ऊपर नीचे हो कर, अपनी चूत चुसवाने का मज़ा लेने लगी और बार बार, अपनी चूत उनके मुंह पर ज़ोर से दबाने लगी।
क्यों की मैं भी उनका लौड़ा चूसना चाहती थी.. इसलिए, मैंने उनको रोका और उनके ऊपर बैठी बैठी ही घूम गई और 69 की पोज़िशन मे आ गई।
अब फिर से, उनका मुंह मेरी चूत पर आ गया था।
मैंने उनके तने हुए, खूबसूरत, मज़बूत, गरम, लंबे और मोटे लौड़े को फिर एक बार धयान से देखा।
क्या शानदार और जानदार लण्ड का मालिक है, मेरा पति और मैं कितनी भाग्यशाली हूँ के मैं ऐसे लौड़े की मालकिन हूँ।

उनके लण्ड मुंड पर कुछ पानी की बूँदें थी, जो की हमेशा ही चुदाई के पहले होती हैं।
मैंने अपनी जीभ, उनके तने हुए चुदाई के औज़ार पर घुमाई और उनके लौड़े से निकले पानी का स्वाद लिया।
मैंने उनके लण्ड का घूँघट उठाया, यानी उनके लण्ड के मुंह की चमड़ी नीचे की और उनके लौड़े का गुलाबी, मोटा सुपाड़ा अपने मुंह मे लिया।
मैं तबीयत से, उनका लण्ड चूसने लगी…
मैंने एक हाथ से उनका लण्ड नीचे से पकड़ रखा था।
मैं उनका लण्ड चूसती जा रही थी और साथ ही साथ, नीचे से उनका लण्ड पकड़ कर मूठ भी मार रही थी ताकि उनको चुदाई के रास्ते पर आधी दूर तक ले जाऊं.. जिस से उनके लण्ड का पानी, चोदते हुए मेरी चूत मे जल्दी निकले..
आप को तो पता है की मेरे पति चुदाई मे बहुत मज़बूत हैं और चुदाई करते हुए, उनके लण्ड से पानी निकलने मे काफ़ी वक़्त लगता है।
ज़्यादा तार उनसे चुदवाते समय, मैं दो बार झड़ जाती हूँ.. जब की उनके लौड़े से, एक बार ही पानी निकलता है।
इसलिए, मैं उनका लौड़ा चूस कर, मूठ मार कर, इतना गरम कर देना चाहती थी की मुझे चोदते हुए, वो भी मेरे साथ ही झडें।
उनके तेज़ी से मेरी चूत चाटने की वजह से, मैं जल्दी ही झड़ गई और मैंने अपनी चूत उनके मुंह पर ज़ोर से दबाई।
वो धीरे धीरे, मेरी चूत से निकला रस चाटने लगे।
उनके मुंह से चुदवा कर, उनकी जीभ से चुदवा कर तो मैं एक बार झड़ गई थी और अब मैं चाहती थी की उनका लंबा और मोटा, उनकी चुदाई का हथियार, उनका गरमा गरम लौड़ा, अपनी चूत मे डलवा कर उनसे चुदवाते हुए उनके लण्ड को अपनी चूत मे निचोड़ लूँ…
मैं चुदवाने के लिए तैयार हो कर, बिस्तर पर सीधी लेट गई और अपनी टाँगें फैला ली, जो उनको मेरे ऊपर आ कर चोदने का खुला निमंत्रण था..
सफर जारी है… …
अपने सुझाव और राय भेजना बंद मत कीजियेगा।
धन्यवाद
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सेक्सी कशिश